अवमानना मामले में विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक को हाईकोर्ट से मिली राहत
न्यायालय ने माना न्याय की प्रक्रिया में नहीं हुआ किसी प्रकार का वास्तविक और गंभीर हस्तक्षेप

संदेश जगत कटनी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (जबलपुर की मुख्य पीठ) ने विजयराघवगढ़ से विधायक संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ दर्ज आपराधिक अवमानना मामले का निपटारा कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की डबल बेंच ने विधायक द्वारा प्रस्तुत की गई बिना शर्त लिखित माफीनामा को स्वीकार करते हुए उन्हें भविष्य में इस प्रकार के कृत्य की पुनरावृत्ति न करने की चेतावनी भी दी है। मामला कटनी जिले से जुड़ी तीन खदान कंपनियों द्वारा 1,200 करोड़ रुपये के कथित अवैध उत्खनन की जांच की मांग से जुड़ा है। याचिकाकर्ता आशुतोष दीक्षित ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर ईओडब्ल्यू शिकायत पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।
इस मामले की सुनवाई के दौरान 1 सितंबर 2025 को संबंधित सिंगल जज की पीठ ने अपने आदेश में दर्ज किया था कि विधायक संजय पाठक द्वारा प्रकरण के संबंध में चर्चा करने के लिए मुझे फोन करने का प्रयास किया गया है, अतः मैं इस याचिका पर सुनवाई करने का इच्छुक नहीं हूँ। इसके बाद, 02 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले का संज्ञान लेते हुए संजय सत्येंद्र पाठक के खिलाफ स्वतः संज्ञान आपराधिक अवमानना मामला दर्ज करने का आदेश दिया था। विधायक संजय पाठक की ओर से देश के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी और अनिल खरे ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि 30 अगस्त 2025 को गलती से जज साहब का नंबर डायल हो गया था, जिसे तुरंत डिस्कनेक्ट कर दिया गया था। फोन कटने के बाद शिष्टाचार के नाते केवल परिचय का मैसेज भेजा गया था। मामले को लेकर जज साहब से किसी भी तरह की कोई सीधी बातचीत या प्रभाव डालने की कोशिश नहीं की गई। विधायक संस्थागत न्यायपालिका का गहरा सम्मान करते हैं और बिना शर्त माफी मांगते हैं। हाई कोर्ट ने अवमानना अधिनियम की धारा 2(c), धारा 12 और धारा 13 के प्रावधानों का हवाला देते हुए माना कि किसी भी व्यक्ति द्वारा सुनवाई कर रहे जज से संपर्क करने का प्रयास करना आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आता है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी पाया कि विधायक ने अपनी गलती स्वीकार की और बिना शर्त माफी मांगी है। यह कृत्य न्याय की स्वाभाविक प्रक्रिया में इतना बड़ा सीधा व्यवधान नहीं था कि इसके लिए सजा या जुर्माना ही लगाया जाए। कोर्ट ने कहा कि हम विधायक संजय सत्येंद्र पाठक का बिना शर्त माफीनामा स्वीकार करते हैं। हालांकि, जन प्रतिनिधि होने के नाते उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे भविष्य में इस तरह के आचरण से बचें और सतर्क रहें।









