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आखिर कौन खा रहा सीएसआर की राशि? मूलभूत सुविधाओं को मोहताज क्षेत्रवासी

आखिर कौन खा रहा सीएसआर की राशि? मूलभूत सुविधाओं को मोहताज क्षेत्रवासी

गैरतलाई में संचालित कुटेश्वर लाइमस्टोन माइंस का मामला, प्रभावित ग्रामीणों ने उठाए सवाल

संदेश जगत कटनी। जिले की विजयराघवगढ़ तहसील क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गैरतलाई में संचालित भारत सरकार के उपक्रम कुटेश्वर लाइमस्टोन माइंस द्वारा प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के विकास एवं मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये की सीएसआर राशि खर्च किए जाने का दावा किया जाता है। इसके बावजूद क्षेत्र के कई गांवों और बस्तियों के ग्रामीण आज भी सड़क, पेयजल, बिजली, शिक्षा, सामुदायिक भवन और अन्य आवश्यक सुविधाओं के लिए परेशान हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि जब प्रभावित क्षेत्रों के विकास के नाम पर सीएसआर मद से बड़ी राशि खर्च की जाती है, तो आखिर उसका लाभ धरातल पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि आखिर सीएसआर की राशि कौन और कहां खर्च कर रहा है, जबकि प्रभावित गांवों के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत तिमुआ अंतर्गत कोनिया बस्ती को माइंस प्रबंधन द्वारा गोद लिए जाने की बात कही गई थी, लेकिन इसके बावजूद बस्ती में अपेक्षित विकास नहीं हो सका है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां अच्छी सड़क, स्कूल, पेयजल व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक भवन, खेल मैदान और शिक्षा से संबंधित बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए थीं, लेकिन आज भी लोगों को कई बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। क्षेत्र के दफाई बस्ती, घंगरारोटा, गैरतलाई, जारारोडा, तिमुआ और कोनिया सहित अन्य प्रभावित गांवों के लोगों ने भी विकास कार्यों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस से प्रभावित होने के बावजूद उन्हें सीएसआर योजनाओं का अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है।प्रभावित ग्रामीणों ने सीएसआर मद में खर्च की गई राशि और उसके तहत कराए गए विकास कार्यों की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित विभाग और माइंस प्रबंधन को सार्वजनिक रूप से यह जानकारी देनी चाहिए कि सीएसआर की राशि किन-किन गांवों में, कितनी और किन विकास कार्यों पर खर्च की गई है।ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में वास्तविक जरूरतों के अनुसार सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक भवन और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए तत्काल ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि वर्षों से सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठे लोगों को राहत मिल सके।

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