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कब्जा तो दूर सरकारी जमीन पर निस्तार करना भी ग्रामीणों को पड़ रहा महंगा, नोटिस और जुर्माने की रकम ने किया हलाकान

कब्जा तो दूर सरकारी जमीन पर निस्तार करना भी ग्रामीणों को पड़ रहा महंगा, नोटिस और जुर्माने की रकम ने किया हलाकान

आधा सैकड़ा की संख्या में देवराकला के गरीब रहवासी पहुंचे संयुक्त तहसील कार्यालय, लगाई न्याय की गुहार

संदेश जगत कटनी। शासकीय जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाले रसूखदारों, पूंजीपतियों, दबंगों पर कार्यवाही करने में प्रशासन को भले ही पसीना छूटता हो लेकिन गरीबों ने अगर सरकारी जमीन पर निस्तार भी किया तो प्रशासनिक अमले की आंखों में खटक जाता है। ऐसा ही कुछ मामला विजयराघवगढ़ क्षेत्र के ग्राम देवराकला का प्रकाश में आया है, जहां आधा सैकड़ा गरीब परिवारों पर प्रशासन के तेवर इसलिए तल्ख हो गए हैं क्योंकि वे शासकीय जमीन पर केवल निस्तार कर रहे हैं। हालांकि जिस जमीन पर लोग निस्तार कर रहे हैं उसका जुर्माना भी अदा कर चुके हैं। ग्रामीणों ने बताया कि वे लगभग 20 साल से शासकीय भूमि पर कब्जा करके निस्तार कर रहे हैं। ऐसे लगभग 40 परिवार हैं जिनके द्वारा गांव में पड़ी शासकीय भूमि पर कब्जा किया गया है। अब उक्त ग्रामीणों का यह कहना है कि गांव में कई जगह लोगों ने सरकारी भूमि पर कब्जा करके अपने मकान निर्माण कर लिए हैं लेकिन न तो पटवारी की नजरें इनायतें होतीं न ही अधिकारियों के हाथ पैर फूलते। वहीं गरीबों द्वारा सरकारी भूमि पर निस्तार करना अधिकारियों को नागंवार गुजर रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि तहसील न्यायालय से नोटिस मिलने पर जुर्माना भुगतान भी किया जा चुका है। ग्रामीणों ने बताया कि अब पुनः ग्रामीणों को तहसील न्यायालय के माध्यम से नोटिस दी गई है जिसमें कहा गया है कि ग्राम देवराकलां स्थित भूमि खसरा नंबर 989, 987,
1021 की भूमि के अंशभाग के रकवे में किये गये अतिक्रमण से बेदखल करने के साथ ही तीन हजार रूपये के साथ अर्थदण्ड से दण्डित किया गया है। चेतावनी दी गई है कि अर्थदण्ड की राशि चलान के माध्यम से जमा कर अपना कब्जा स्वयं
हटा लें तथा नियत तिथि तक अर्थदण्ड की राशि जमा न करने एवं कब्जा न हटाने पर
प्रशासन द्वारा कब्जा हटाने की कार्यवाही की जावेगी। यही नहीं कब्जा हटाने मे आने वाला
व्यय भू-राजस्व की भाँति ग्रामीणों से वसूल किया जावेगा यह भी नोटिस में उल्लेख है। ग्राम देवराकला निवासी
दयाराम वंशकार, संतोष चक्रवर्ती, दरबारी लाल प्रजापति, रामकिशोर चक्रवर्ती, राजेश चक्रवर्ती, राजकुमार चक्रवर्ती, सुरेन्द्र चक्रवर्ती, सुनील चक्रवर्ती, मदन चक्रवर्ती, अशोक वंशकार, दिनेश वंशकार, मंताकी चक्रवर्ती, श्यामलाल चक्रवर्ती, गुड्डा चक्रवर्ती, श्रीचरण चक्रवर्ती, रामचरण चक्रवर्ती, संतोष चक्रवर्ती, राखी बाई चक्रवर्ती, अठी चक्रवर्ती, राममिलन चक्रवर्ती, शीला बाई चक्रवर्ती, रामनरेश चक्रवर्ती, सुरेश चक्रवर्ती, कमलेश चक्रवर्ती, बसोरी चक्रवर्ती, राजकुमार चक्रवर्ती, मिठाई लाल चक्रवर्ती, चमरू लाल चक्रवर्ती, हरछठ लाल चक्रवर्ती, संतोष चक्रवर्ती आदि संयुक्त तहसील कार्यालय विजयराघवगढ़ पहुंचे जहां उन्होंने न्याय की गुहार लगाई है। यहां खास बात यह है कि संतोष चक्रवर्ती को भी कब्जा हटाने और जुर्माने की राशि अदा करने का नोटिस दिया गया है जबकि संतोष चक्रवर्ती द्वारा किसी प्रकार जा कब्जा किया ही नहीं गया। फिलहाल प्रशासन की इस कार्यवाही से ग्रामीण परेशान हलाकान हैं और रहम की आश लगाए बैठे हैं।

 

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