वर्ष 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों के लिए टी.ई.टी. परीक्षा की अनिवार्यता समाप्त किए जाने एवं
शिक्षकों के सेवा अधिकारों के संरक्षण की रखी मांग

संदेश जगत कटनी। टेट संघर्ष समिति राज्य संयुक्त मोर्चा विजयराघवगढ़ के तत्वावधान में मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन के नाम से अनुविभागीय अधिकारी अनुभाग विजय राघवगढ़ के प्रतिनिधि तहसीलदार को टेट के विरोध में ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से कहा गया है कि प्रदेश के शिक्षकों के लिए सशर्त टी.ई.टी. परीक्षा संबंधी आदेश जारी किए गए हैं, जिनमें परीक्षा परिणाम के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसी कठोर कार्यवाही का प्रावधान किया गया है तथा जुलाई-अगस्त माह में परीक्षा आयोजन प्रस्तावित है। प्रदेश में वर्ष 1998 से 2010 तक नियुक्त समस्त शिक्षक तत्कालीन शासन द्वारा निर्धारित नियमों, सेवा शर्तों एवं चयन प्रक्रिया के अनुरूप नियुक्त किए गए थे। उस समय जो योग्यताएँ शासन द्वारा निर्धारित थीं, उन्हीं के आधार पर शिक्षकों ने चयन प्राप्त किया और विगत 20-25 वर्षों से निरंतर सेवा दे रहे हैं। ऐसी स्थिति में बाद में लागू की गई पात्रता परीक्षा को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना न्याय, तर्क एवं प्राकृतिक सिद्धांतों के विपरीत है। शिक्षा का अधिकार वर्ष 2010 में लागू हुआ। अतः इस अधिनियम के बाद निर्धारित शर्तों को पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर लागू करना पूर्णतः अव्यावहारिक एवं अन्यायपूर्ण है। सेवा के दो दशकों से अधिक समय बाद शिक्षकों को पुनः परीक्षा के दायरे में लाकर परीक्षा परिणाम के आधार पर सेवा समाप्ति अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति का भय उत्पन्न करना लाखों परिवारों को असुरक्षा एवं मानसिक तनाव की स्थिति में डाल रहा है। प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख से दो लाख शिक्षक एवं उनके परिवार इस आदेश से प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित होंगे यह केवल शिक्षकों का विषय नहीं, बल्कि लाखों परिवारों की आजीविका, सामाजिक स्थिरता एवं शिक्षा व्यवस्था की निरंतरता से जुड़ा विषय है। शिक्षक संवर्ग द्वारा मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि
वर्ष 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों हेतु टी.ई.टी. परीक्षा की अनिवार्यता तत्काल समाप्त अथवा
पूर्णतः शिथिल की जाए। यह भी मांग की गई कि शिक्षकों के हित में आवश्यक होने पर उच्चतम न्यायालय में पुनर्विचार याचिका प्रस्तुत की जाए, सेवा में कार्यरत शिक्षकों के अर्जित अधिकारों एवं सम्मान की रक्षा सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षकों को असुरक्षा के वातावरण में डालना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। शिक्षक सदैव राष्ट्र निर्माण, समाज निर्माण एवं भविष्य निर्माण के केंद्र में रहा है। हमें पूर्ण विश्वास है कि मध्य प्रदेश शासन अपने शिक्षकों के साथ न्याय करेगा तथा ऐसी नीति अपनाएगा जिससे शिक्षक सम्मानपूर्वक, निर्भय होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर सकें। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिला प्रतिनिधि के रूप में प्रदीप कुमार तिवारी, सुरेंद्र कुमार मिश्रा, तहसील अध्यक्ष श्रीषदत्त दत्त पांडेय, प्रमोद कुमार प्यासी, संतोष कुमार मिश्रा, विपिन कुमार धनेंद्र गौतम, जयप्रकाश बडगैयां, कैलाश प्रसाद तिवारी, बलराम सिंह, मृदुल नामदेव, सुरेश सूर्यवंशी, वृंदावन, संतोष देवी मिश्रा, वंदना शुक्ला, सीमा मौर्य, रमेश कुमार तिवारी, रोहित कुमार दुबे सहित सैकड़ो शिक्षकों की उपस्थिति थी।










