
ऐतिहासिक नगरी पुष्पावती में हुई काव्य वर्षा, ख्यातिलब्ध कवियों ने शानदार रचनाओं से बांधा शमां
गीत, गजलों, कविताओं, हास्य, व्यंग्यों को सुनकर मंत्रमुग्ध हुए लोग, ठहाकों से गूंजा कार्यक्रम स्थल
संदेश जगत कटनी। कल्चुरी वंश के राजा कर्ण की नगरी पुष्पावती जिसे आज बिलहरी के नाम से जाना जाता है, वहां शरद पूर्णिमा के अवसर पर कवि सम्मेलन का शानदार आयोजन हुआ। फ्रीडम फाइटर, साहित्यकार रामविशाल शर्मा की स्मृति में इतिहासकार ठाकुर राजेंद्र सिंह के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण से हुई। अगले क्रम में विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कवियों के परिचय और सम्मान की परंपरा का निर्वहन किया गया। वरिष्ठ कवि विष्णु बाजपेई द्वारा मां सरस्वती की वंदना के साथ ही कवि सम्मेलन का आगाज किया गया। बिलहरी क्षेत्र के कवि
श्री बेन द्वारा कविता पाठक किया गया और वाहवाही लूटी गई। इसके बाद ग्राम डिठवारा के युवा कवि रामानुज पांडेय ने अपनी रचनाओं के माध्यम से लोगों को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम की श्रृंखला में कवि ठाकुर राजेंद्र सिंह, अजय सिंह जी बघेल, रामनरेश विद्यार्थी, डॉक्टर राजेश श्रीवास्तव प्रखर, क्षेत्रीय कवि श्री बख्शी, गीतकार अजय त्रिपाठी, द्वारा एक से बढ़कर एक शानदार रचनाओं का पाठ किया गया और तालियां बटोरी गईं। बिलहरी के गयाकुंड में आयोजित का सम्मेलन में कवियों की प्रस्तुतियों ने देर रात तक लोगों को मनोरंजक वातावरण की माला में पिरोने का काम किया। काव्यवर्षा के इस अवसर पर शशंकर जी महाराज, गयाकुंड ट्रस्ट बिलहरी अध्यक्ष सुधीर ताम्रकार, उपाध्यक्ष सुनील नायक, अभिलाष चौरसिया, संतोष मांझी, जनपद सदस्य अखिल सोनी, शलभ शुक्ला, कैलाश वर्मा, दशरथ पांडे. रज्जन ताम्रकार, रामनारायण उपाध्याय, मुन्नी लाल ठाकुर, मनोज नायक जी, प्रकाश बर्मन, पूरन सोनी, जयप्रकाश चौरसिया, जगदीश यादव, मंझल सोनी, जगदीश पटेल, ब्रजराज अग्रवाल, चंदन यादव, गया कुंड मंदिर की साध्वी गीता दीदी सहित बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति थी। कवि सम्मेलन का संचालन कवि अजय सिंह बघेल ने लिया।









